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पीएम2.5 ऐसे प्रदूषणकारी तत्वों को दर्शाते हैं जिनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर से भी कम होता है। ठोस प्रदूषक तत्वों और तरल पदार्थों के मिश्रण से बने ऐसे कण व्यक्ति के फेफड़ों और रक्त प्रवाह तक पहुंच सकते हैं और सांस संबंधी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। फिलहाल, दिल्ली का पीएम2.5 स्तर डब्ल्यूएचओ के मानक से 20 गुना अधिक है।
short by आशुतोष त्रिपाठी / 10:37 am on 11 Nov
खगोलविदों की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने बताया है कि सूर्य का केंद्र उसकी सतह के मुकाबले 4 गुना तेज़ी से घूमता है। 4.6 अरब वर्ष पहले सूर्य की उत्पत्ति के समय से ही सूर्य के केंद्र का घूमना इसका संभावित कारण हो सकता है। बतौर अध्ययन, सूर्य का केंद्र उसकी सतह के मुकाबले 3,000 गुना ज़्यादा गर्म होता है।
short by श्वेता वत्स / 08:44 pm on 02 Aug
ब्रिटेन स्थित शोधकर्ताओं को प्रशांत महासागर में करीब 11 किलोमीटर गहराई पर मिलने वाले जीव-जंतुओं के पेट में प्लास्टिक फाइबर मिले हैं। शोधकर्ताओं ने समुद्र में सर्वाधिक गहराई वाले ज्ञात स्थान चैलेंजर डीप (मारियाना गर्त) समेत गर्तों में मिलने वाले जीवों के सैंपल का अध्ययन किया था। 1950 से अब तक 8.3 अरब टन प्लास्टिक के उत्पादन का अनुमान है।
short by जय शंकर / 10:53 am on 17 Nov
'कौन बनेगा करोड़पति 9' में ₹7 करोड़ का जैकपॉट प्रश्न नोबेल पुरस्कार से जुड़ा था। प्रतिभागी अनामिका मजूमदार से पूछा गया था कि 4 विकल्पों में से कौन सी अभिभावक-बच्चे की जोड़ी नोबेल पुरस्कार विजेता नहीं है। इस सीज़न में ₹1 करोड़ जीतने वाली पहली प्रतिभागी अनामिका ने सही उत्तर (विकल्प डी) ना पता होने पर खेल छोड़ दिया था।
short by शैफाली जैन / 07:48 pm on 04 Oct
इटली के एस्ट्रोनॉट पाओलो नेसपोली ने दिवाली की रात अंतरिक्ष से ली गई भारत की तस्वीर ट्वीट करते हुए दिवाली की शुभकामनाएं दी हैं। 60 वर्षीय नेसपोली ने ट्वीट किया, " आज हिंदुओं का प्रकाश पर्व दिवाली है। सभी को दिवाली की शुभकामनाएं।" गौरतलब है कि नेसपोली इस समय यूरोपियन स्पेस एजेंसी की तरफ से स्पेस मिशन पर हैं।
short by सुधीर झा / 12:26 pm on 22 Oct
पानी में बुलबुले अपने बायन्सी (बायंट बल) के कारण ऊपर उठते हैं क्योंकि हवा पानी से हल्की होती है। हालांकि, बुलबुले वर्टिकल ना उठकर ज़िग-ज़ैग तरीके से ऊपर उठते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, बुलबुलों के उठने के तरीके को उनकी घूर्णन गति (रोटेशन) के माध्यम से समझा जा सकता है, जो 'मूमेंट ऑफ इनर्शिया' द्वारा संचालित होती है।
short by शुभम गुप्ता / 07:17 pm on 19 Aug
एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू मैगज़ीन की 'इनोवेटर्स अंडर 35' सूची में इस वर्ष 3 भारतीय नाम शामिल हैं। मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी की राधा बोया को वाटर-फिल्टरेशन के लिए दुनिया का सबसे पतला फ्लुइड चैनल बनाने, जोन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की सुची सरिया को बीमारी पहचानने वाला एल्गोरिदम बनाने और नेहा नरखेड़े को डेटा हैंडलिंग सिस्टम बनाने के लिए इसमें शामिल किया गया है।
short by श्वेता वत्स / 03:53 pm on 18 Aug
नासा ने 'आर्किनॉट' प्रोजेक्ट के तहत 3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का सफल लॉन्च किया है, जो अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियों और वातावरण में काम कर सकेगी। प्रोजेक्ट के तहत, अंतरिक्ष में हार्डवेयर का निर्माण और उसकी असेंबलिंग की जाएगी। इस टेक्नोलॉजी से अंतरिक्ष में अनिश्चित लंबाई की संरचनाएं बनाई जा सकेंगी और रॉकेट से हैवी स्ट्रक्चर लॉन्च करने की लागत घट जाएगी।
short by शुभम गुप्ता / 08:22 pm on 21 Aug
भारतीय मूल की 16 वर्षीय छात्रा काव्या कोपारपू ने डायबिटीज़ के कारण आंखों को नुकसान पहुंचाने वाले लक्षणों का पता लगाने के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिस्टम बनाया है। काव्या ने बताया कि बीमारी का पता लगाने में हुई देरी के चलते उसके दादा की आंखों की रोशनी कम हो गई थी इसलिए उसने यह सिस्टम बनाया है।
short by श्वेता वत्स / 08:26 pm on 09 Aug
उत्तरी अमेरिका के तालाबों के पास पहली बार लिक्नोथेमस बारबेटस नामक हरे रंग का जीवित शैवाल मिला है। दरअसल, इसका अस्तित्व क्रिटेशियस (जियोलॉजिकल टाइम पीरियड) युग के जीवाश्मों में था और इस दौरान डायनासोर अस्तित्व में थे। गौरतलब है, विस्कॉन्सिन (अमेरिका) के 14 तालाबों से इसके नमूने लिए गए थे। यूरोप और ऑस्ट्रेलासिया में यह अब भी अस्तित्व में है।
short by श्वेता वत्स / 08:44 pm on 01 Aug
एलियंस और दूसरे ग्रहों से पृथ्वी की सुरक्षा के लिए नासा नए 'प्लैनेटरी प्रोटेक्शन ऑफिसर' को ढूंढ रही है, जिसके लिए अधिकारी को सालाना करीब ₹1.1 करोड़ ($187,000) मिलेंगे। उसका काम धरती और चंद्रमा पर मानवीय प्रदूषणों की रोकथाम करना भी होगा। इस पद पर नियुक्ति 3 वर्ष के लिए होगी, जो बढ़कर 5 वर्ष भी हो सकती है।
short by शुभम गुप्ता / 09:02 pm on 05 Aug
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि 224-383 ई. में बख्शाली पांडुलिपि में लिखी गई प्राचीन भारतीय पाठ्यसामग्री शून्य के अस्तित्व का सबसे पुराना साक्ष्य है। वैज्ञानिकों का कहना है कि दस्तावेज़ में शून्य को अंक के बजाय एक डॉट सिंबल के तौर पर दर्शाया गया है जिसने बाद में अपना मौजूदा रूप हासिल कर लिया।
short by आशुतोष त्रिपाठी / 10:07 pm on 14 Sep
राइस यूनिवर्सिटी (अमेरिका) के शोधकर्ताओं ने पूर्वी प्रशांत महासागर में इक्वाडोर तट के पास एक नई टेक्टोनिक प्लेट खोजने का दावा किया है। इसका नाम एक कोलंबियाई द्वीप 'मालपेलो' के नाम पर रखा गया है। मालपेलो को मिलाकर अब तक कुल 57 टेक्टोनिक प्लेट खोजी जा चुकी हैं। दरअसल, भूकंप आने का एक प्रमुख कारण टेक्टोनिक प्लेटों का टकराना है।
short by शुभम गुप्ता / 02:43 pm on 17 Aug
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने चूहों पर अध्ययन कर दावा किया है कि मच्छर से होने वाला ज़ीका वायरस 'ग्लायोब्लास्टोमा' (सामान्यतया होने वाला दिमागी कैंसर) के लिए ज़िम्मेदार कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर सकता है। बतौर अध्ययन, यह वायरस शरीर में कैंसर स्टेम सेल्स (कोशिकाएं) को निशाना बनाता है। इस अध्ययन का प्रयोग मानव पर 18 महीने के अंदर हो सकता है।
short by शुभम गुप्ता / 06:40 pm on 07 Sep
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (अमेरिका) के वैज्ञानिकों ने रक्त में पाए जाने वाले डीएनए फ्रैगमेन्ट्स के आधार पर बताया है कि मानव शरीर में मौजूद 99% रोगाणुओं (माइक्रोब्स) के बारे में विज्ञान को कोई जानकारी नहीं है। शोधकर्ता स्टीफेन क्वेक ने बताया कि अध्ययन में उन्हें जो जानकारियां मिली हैं, उनमें से कई जानकारियां अलग और बिलकुल नई हैं।
short by शुभम गुप्ता / 09:58 pm on 07 Sep
अमेरिकी शोधकर्ताओं ने बैक्टीरिया से संचालित हाई-परफॉर्मेंस बैटरी 'origami' बनाई है जिसे लार (सैलाइवा) के ज़रिए ऐक्टिवेट किया जा सकता है। पेपर से बनी यह डिसपोज़ेबल बैटरी OLED को 20 मिनट तक जलाए रखने में मदद कर सकती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस बैटरी का इस्तेमाल ऐसी जगहों पर किया जा सकता है जहां सामान्य बैटरियां काम नहीं करती हैं।
short by श्वेता वत्स / 10:56 pm on 09 Aug
अमेरिकी शोधकर्ताओं के अध्ययन के मुताबिक, खेती से उपजे अनाज को चबाने और दुग्ध उत्पादों से मानव की खोपड़ी के आकार पर महत्वपूर्ण असर हुआ है। इसका सर्वाधिक असर उन लोगों की खोपड़ी पर पड़ा, जिन्होंने दुग्ध उत्पादों का सेवन किया। इसके लिए शोधकर्ताओं ने दुनिया भर में 559 क्रेनिअा (खोपड़ी का एक भाग) और 534 जबड़ों का अध्ययन किया।
short by शुभम गुप्ता / 07:26 pm on 25 Aug
ऑस्ट्रेलिया में सफेद रंग का एक दुर्लभ सांप पाया गया है जो सामान्यतया डार्क ब्राउन रंग का होता है। अनुमान है कि सांप के जीन में दुर्लभ अनुवांशिक परिवर्तन के कारण इसके रंग में बदलाव हुआ है। बतौर विशेषज्ञ, सांप का किशोरावस्था तक जीवित रहना आश्चर्यजनक है क्योंकि सफेद रंग के कारण शिकारी इसे आसानी से पकड़ सकते हैं।
short by श्वेता वत्स / 09:57 pm on 01 Aug
अमेरिका में एक जोड़े ने सोलर एक्लिप्स (सूर्यग्रहण) के दिन जन्मी अपनी बेटी का नाम 'एक्लिप्स' रखा है। एक्लिप्स के सितंबर में जन्म लेने की उम्मीद थी और उसके माता-पिता उसका नाम 'वायलेट' रखना चाहते थे लेकिन सूर्यग्रहण के दिन बच्ची के जन्म लेने के बाद उन्होंने मन बदल लिया। उसकी मां ने कहा, "हम शायद उसे 'क्लिप्सी' कहकर बुलाएंगे।"
short by मोनिका शर्मा / 04:00 pm on 24 Aug
जापानी वैज्ञानिकों ने पहली बार CRISPR/Cas9 जीन एडिटिंग तकनीक की मदद से फूल का रंग बैंगनी से सफेद कर दिया। इसके लिए वैज्ञानिकों ने फूल के एक जीन में बदलाव किए और इसकी सफलता दर 75% रही। इस तकनीक में डीएनए के एक हिस्से के दो सिरों को काट दिया जाता है, जिसकी मदद से डीएनए में बदलाव होता है।
short by शुभम गुप्ता / 06:59 pm on 07 Sep
अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री जैक फिशर ने स्पेस से पृथ्वी का टाइम लैप्स वीडियो शेयर किया है। इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन से 28,000 किलोमीटर/घंटा से ज़्यादा गति के साथ अमेरिका के ऊपर से गुज़रते वक्त यह वीडियो रिकॉर्ड किया गया। फिशर ने ट्वीट किया, "यह मुझे हमेशा आश्चर्यचकित करता है कि हम कितनी तेज़ी से दुनिया का चक्कर लगा रहे हैं।"
short by शुभम गुप्ता / 08:06 pm on 03 Aug
'न्यूरोबायोलॉजी ऑफ एजिंग' जर्नल में छपे अध्ययन के मुताबिक, पिछले कुछ दशकों में वैज्ञानिकों ने 20 चिम्पैंजियों के दिमाग के अध्ययन में पाया है कि इनमें से 12 में पहली बार अल्ज़ाइमर के लक्षण मिले हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसके लक्षण उम्रदराज़ चिम्पैंजियों में मिले हैं। इस शोध से अल्ज़ाइमर के लिए नई दवा बनाने में मदद मिल सकती है।
short by शुभम गुप्ता / 11:10 pm on 05 Aug
एक अध्ययन के मुताबिक, केक पर लगी मोमबत्ती बुझाने के लिए फूंक मारने से केक पर 14 गुना अधिक बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं। अध्ययन से सामने आया कि ये बैक्टीरिया व्यक्ति की लार में मौजूद होते हैं और हर बार फूंक से अलग-अलग प्रकार के बैक्टीरिया निकलते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इनमें से अधिकांश बैक्टीरिया हानिकारक नहीं होते हैं।
short by श्वेता वत्स / 09:00 am on 01 Aug
जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले वर्ष टिक वायरस से संक्रमित बिल्ली द्वारा काटने पर एक महिला की मौत हो गई थी। बतौर अधिकारी, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि महिला में टिक वायरस बिल्ली से आया था या नहीं। अगर ऐसा हुआ है तो जानवर से इंसान में टिक वायरस के प्रसार का यह पहला मामला होगा।
short by श्वेता वत्स / 10:36 pm on 27 Jul
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के मुताबिक, मरीज़ों को डॉक्टर द्वारा दी गई एंटीबायोटिक्स दवाएं एक निश्चित अवधि तक लेने का नियम उचित नहीं है और बेहतर महसूस होने पर दवाएं बंद की जा सकती हैं। इसमें बताया गया है कि अधिक मात्रा में दवा लेने से बीमारियों के बैक्टीरिया पर दवाओं का असर खत्म हो जाता है।
short by चन्द्रकान्त शर्मा / 10:43 pm on 30 Jul
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